पुष्कल

वैश्वदेवीं वर्चस आ रभध्वं,शुद्धा भवन्तः शुचयः पावकाः ॥अतिक्रामन्तो दुरिता पदानि,शतं हिमाः सर्ववीरा मदेम ॥‘‘अथर्व0 12/2/28” हमारे विचार सदैव शुद्ध व पवित्र रहें। हम दूसरों को भी कुमार्ग से बचाकर सन्मार्ग की ओर ले जाऍ, ताकि सभी मिलकर पूर्ण आयुष्य प्राप्त करें।

Read More..