Category: गुरूजी की कलम से

gandhi ji

स्वतंत्रता संग्राम में बापू का योगदान

भारत की पवित्र भूमि अलैकिक संतों की जन्मस्थली एवं कर्मस्थली रही है। अनोखे प्रतिभाशाली महात्मा गाॅधी ऐसे ही कर्मयोगी थे। जिन्होंने राष्ट्रहित के लिए दधिचि की भाॅति अपनी अस्थियों तक का समर्पण कर दिया। अपनी त्याग, सेवा, कर्तव्यनिष्ठा एवं सत्यनिष्ठा के कारण साधारण आत्मा से महात्मा बनने वाले महात्मा गांधी ने भारत के निर्माण में […]

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राष्ट्र की दुरवस्था के कारण और समाधान

विगत 66 वर्ष पूर्व दे स्वतंत्र हुआ। स्वतंत्रता के इतने वर्ष पश्चात् भी देश या यों कहे कि ‘राष्ट्र जीवन की दिशा’ निश्चित नहीं हो पायी। यदि हम चाहते तो भारतीय शिक्षा पद्धति द्वारा पराधीनता तथा परकीयता के समस्त कलंक धो दिये होते, परन्तु हम ही आत्म विस्मृत हो कर स्व को तिलांजलि देकर अनजाने […]

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वैज्ञानिक अध्यात्मवाद

विद्वानों के मतानुसार ‘आवश्यकता हीं आविष्कार की जननी है’ अर्थात् बिना आवश्यकता के प्रायः किसी भाषा, विषय, जीवन पद्धति, साधन, सुविधा का सृजन नहीं होता है। सृष्टि के प्रारम्भ काल से निर्माण एवं विध्वंश का कार्य अनवरत रूप से चलता रहता है। दो स्तरों पर निर्माण होता है एक प्रकृति ;ईश्वरद्ध तथा दूसरा मानव द्वारा। […]

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धर्म निरपेक्षता और पंथ निरपेक्षता

सृष्टि के प्रारम्भ काल से आज तक निर्माण एवं विध्वंस होता आ रहा है। सृजन और विनाश दो स्तरों पर होता है प्रथमतः प्रकृति अथवा ईश्वर द्वारा तथा द्वितीय स्तर पर देखा जाय तो मानव द्वारा किये गये निर्माण तथा विनाश। मानव द्वारा निर्मित व्यवस्थाएॅ, विषय, भाषाएँ, शासन प्रणाली तथा जीवन पद्धतियाॅ अनेक प्रकार की […]

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